Tuesday, February 7, 2017

छानी में

सर्द मौसम की चपेट में
गर्द कोहरे की लपेट में
थरथरातें हाथों से
छानी में खोले मिठाई के खाली बक्से
कुछ ज़र्रे गत्तों के किनारों में फसे
उस पुरानी महक में खामोश सोये

ठंडी लहरों के लम्स से ठिठुरते ज़र्रे
उन से झाँकती-मुस्कुराती यादें
यादों में पले गर्म लम्हों की चिंगारियाँ
उन में सुलगते अधुरे कुछ वादे

ज़र्रों के इर्द-गिर्द मंडराती मुस्कराहटें
छानी में बिखरी कुछ गर्म हसरतें
कोहरे में छिपी हैरान करवटें
इतराती, शरमाती काली हसीन रातें
पायल की झंकार, झुमके की झनझन
चमचमाते मोती और खनकते कंगन
मिसरी सी बातें, खट्टी शरारतें
तिखी नज़रों में प्यार की बरसातें
मिट्टी का स्वाद, तितली की मुराद
गुल्लक में समाये नन्हे ख्वाब ज़िन्दाबाद
यारों की मस्ती, वादों से दोस्ती
कलियों संग झूमती मदहोश वो कश्ती

महफूज है इस बक्से में, 
मन के हर गलियारे में,
छानी की ठंडी फ़र्श पर, 
रूह के हर ज़र्रे में

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