Wednesday, December 7, 2016

कहानी

वो सपनें बोता रहा
वो यादें बुनती रही
वो चाँदनियाँ जोड़ता रहा
वो चाँद से जुड़ने लगी
उस रात ने कैसा जादू किया
एक कहानी रंगने लगी

हर लम्हा एक सैलाब था
हर पल भी बेताब था
हवाओं में थी कश्मकश
महकी-बहकी थी वो दिलकश
उस माहौल ने मदहोश किया
एक कहानी सजने लगी

वो आँखों में डूब गया
वो बातों में खो गयी
वो लफ़्जो में सुलगता गया
वो सुरों में पिघलती गयी
उस सरगम में तार छेड़ गयी
एक कहानी गुनगुनाने लगी

होठों पे थमीं कुछ बात थी
मध्धम चली चाँदनी रात थी
सीने में पला था एक शरार
एक सांस ने कर दिया आश्कार
बस, महक उठा सारा जहाँ
वो कहानी खिलने लगी

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