Tuesday, October 25, 2016

होने दे सुबह

तेरी मंज़िल खोले बाहें
चल हसते-गाते राहें
मौसम भी संग है सारे
कुछ कह रहे है ये तारे

न रूकने दे कदम
भूला दे सारे गम
हर मुश्किल को निगल कर तू निकल
होने दे सुबह, खुलने दे पंख
किरनों के संग तू बादलों पे चल
वादियों में घूम, हवाओं संग झूम
आसमाँ को चूम, तू जी ले हर पल

खुशियों के बरसे मोती
जुगनू बन जाये ज्योति
हर दिन रंग लाये होली
सौगातें भर दे झोली

ऐसा हो ये सफ़र
साया हो हमसफ़र
यादों को बाँध के तू फिर निकल
होठों पे हसीं, दिल मे जगी
ख़्वाबों की टोली तू संग ले के चल
गिर जा कभी, संभल जा कभी
थाम ले उसे, जो कहे ऐसी गल

वो है तेरा जो है तुझमे
समझ़ ले, ना दे बुझने
उम्मीदों के ये शोले
बो देना थोडे मुझमे

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