Tuesday, September 27, 2016

पल

अकेले से कुछ पल हैं दिल मे मेहफ़ूज़
खोलू तो आँसू और चेहरा मायूस
हस्ते, मुस्कुराते
उड़ते, लड़खड़ाते
वो पल हैं, तरल हैं
छूटे तो हलचल है
ये गीले पल हैं दिल के पास
फिर से जीने की है आस
हस़रतों की गूंज है
पल जो दिल मे मेहफ़ूज़ हैं

ये ख्वाबों की है साज़िश
कुछ याद़ों की है रंजिश
अंदर उठे तूफ़ान मे फसे हुए कुछ पल है
गर्तों मे हिचकाते बिछड़े कुछ कल है
पर यादों की खनखनाहट की है नुमाइश
कुछ मीठे पलों की है नवाजिश
मन के चमन मे खुशियों की मधूर कूज
पल जो दिल मे है रहे मेहफ़ूज़

गलियों मे मंडराते कुछ पल हैं
छत पे महकती मुलाकातें हैं
बूंदों से झांकती धनक पे बैठे
पत्तों से उलझते
शाखों से सुलझते
किरणों पे सवार हसीन याद़ें हैं
इस मंजर मे खोया सूझबूझ
ये पल रहे सदा इस दिल मे मेहफ़ूज़

2 comments:

  1. waa.... I am sure that everyone has kept most unforgatable moments safe somewhere.

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  2. waa.... I am sure that everyone has kept most unforgatable moments safe somewhere.

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