Thursday, September 1, 2016

छूटेगा

छूटेगा छूटेगा छूटेगा
तेरे हाथ से
तेरी बात से
तकदीर से
जंजीर से
वक्त फिसलता जाएगा
बस्स यादें हाथ दे जाएगा

दिल मे दबाए कुछ ख्वाब है
मन मे छुपाए जवाब है
खुद से पूछे कईं सवाल है
ना जाने ऐसा क्यों हाल है

तेरी यह परछाईयाँ
डसने लगी तन्हाईंयाँ
यादों की तेज बर्छियाँ
बढने लगी हैं दूरियाँ

छत पे सुलगती कुछ बातें हैं
होठों पे सजती हसीन रातें हैं
बाहों मे पिघली मुरादें हैं
झुल्फों मे महकी बरसातें हैं

वक्त ये मंजर कुचल देगा
बदले मे दर्दभरे पल देगा
इन्हे जी ले अभी
इन्हे पी ले सभी
जो छूटेगा ना फिर कभी तेरा होगा

No comments:

Post a Comment