Sunday, January 31, 2016

रांड Returns

रांड - तू फिर आ गया? साला तू ठोकता तो है नही, फिर आता क्यों है?
ठोकनेवाला - तेरे बदन के लिए नहीं आता, तेरे दिमाग का दिवाना हूं| उसी का रोकडा दिया है|
रांड - फालतू की बकबक मत कर| चूपचाप टंकी खाली कर और निकल|
ठोकनेवाला - भेंचोद, किस बात की अकड है बे तुझ मे? बदन ही तो बेचती है|
रांड - अबे घनचक्कर, वो बेचना भी आना चाहिए| सिर्फ खडी रह के पैसा नही मिलता| अकड के खडी रहती हूं इसलिए रोकडा आता है|
ठोकनेवाला - अच्छा! तो तू अकड बेचती है?
रांड - हर बार तू साबित कर देता है की तू च्युतिया है| अकडती हूं इसलिए मेरा बदन बिकता है| खुद को बेचने का तरीका है वो| तुझे घमंड है अपनी अकल पे तो चल कुछ बेच के दिखा| फुटी कौडी भी नही मिलेगी|
ठोकनेवाला - तुझे बडा पता है बेचने के बारे मे| मुझे बदन बेचने की जरूरत नही|  मैं दिमाग बेचता हूं अपना|
रांड - दिमाग का इतना ही गुरूर है तो खडा रह बाजार मे| देखते हैं कितना धंदा कर पाता है|
ठोकनेवाला - तुझे क्या लगता है? बेचना सिर्फ तुझे आता है|
रांड - तुझे आता तो तू मेरी गली मे नहीं दिखता| तू जो करता है उसे बेचना नही कहते; उसे गधामजुरी बोलते हैं| तू जो करता है वो तेरे पेट की भूख मिटाने के लिए| मेरे पास आता है जिस्म की भूख मिटाने के लिए| लेकीन अपने जज्बातों की, अरमानों की भूख तू तब तक नही मिटा पाएगा जब तक तू दिमाग बेचना नही सिखे|

No comments:

Post a Comment