Thursday, January 7, 2016

गुब्बारे

ख्वाबों को लिए उडे गुब्बारे
रंगबेरंग सपनों को साथ लिये सारे

गुब्बारे मे उडती दोस्ती की कश्ती
तफ्री के झोकों पर झूमती उछलती
यारों को बतलाती कहानी अपनी
भोलीभाली, खट्टीमीठी बातें बनीबनी
बारिश मे भीगी सुनहरी कहानी
ओस की बुंदों मे यादें सुहानी
गुब्बारे के रंग मे खोयी
दोस्त के आघोश मे सोयी

गुब्बारे मे बसी है इक हसीन कहानी
खुशियों के महल मे सजधज के बैठी रानी
राजा का है इंतजार
फस गया है दूर उस पार
मुश्किलों से झुंझते
महल को ढूंढते
समंदर पार लग गयी राजा की नैय्यां
मुस्कुराई रानी, दिख गये जो सैय्यां

काले बादलों मे उडता गुब्बारा अकेला
अनकही कहानी गोद लिए अलबेला
फडफडाती हवाओं से
कडकडाती बिजली से
लपक-झपक के
उलझ-सुलझ के 
मिला बादलों का काफिला
गुब्बारा जो फुटा, लगा कहानियों का मेला

1 comment:

  1. अप्रतिम..कब मिलेगी वो रानी..जिस्की हे ये कहानी..����

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