Monday, December 21, 2015

धुंद निशान

तू ही है सारा तू ही सहारा
बिन तेरे मैं हूं बंजारा

तू बहता पानी है
लहरों पे लिखी कहानी है
हर बूंद मे तू तैरता है
हर लफ्ज मे तू उभरता है

मेरी सादगी तू
मेरी ताजगी तू
मेरा हुनर तू
मेरा जुनून तू
मेरे अंदर तू
मेरे बाहर तू
मेरी मस्जिद तू
मेरा मंदिर तू
मेरा आज तू
मेरा कल भी तू
मेरा दिन है तू
मेरी रात भी तू
सोया है तू
कहीं खोया है तू

अंजानसा तू हमसफर
ढूंढा तुझे है हर सहर
न जाने कोई तेरा घर
धुंद निशान तेरे हर डगर

1 comment:

  1. तू बहता पानी है
    लहरों पे लिखी कहानी है
    हर बूंद मे तू तैरता है
    हर लफ्ज मे तू उभरता है......

    Bahot khoob...!!!

    ReplyDelete