Friday, December 25, 2015

सरहद पार

थोडा नशीला थोडा रंगीला
थोडा सांवला थोडा बांवला
बदतमीज भी बेशरम भी
बिगडे पल मे
मरहम भी
खुशी के झोके पर वो सवार
सरहद पार है मेरा यार

कभी नरमसा कभी गरमसा
कभी जहरीला कभी शर्मिला
रूह से मेरे रूबरू है
खुदगर्ज भी है
मगरूर भी है
दिल के कोने मे गुब्बार
सरहद पार है मेरा यार

बाशहूर भी बचकाना भी
शरारत भी नजाकत भी
आँखो मे इक जाम है
सांसो मे हसीन शाम है
मस्तमौजी भंवर को
इक तितली ने फांसा है
दो लफ्जों ने छेड दी सितार
सरहद पार है मेरा यार

कभी मिर्च कभी शहद
कभी सुख कभी दर्द
सूर भी सरगम भी
जमघट मे गुंजती
इक खामोशी भी
पोशिदा सलाखों मे कैद प्यार
सरहद पार है मेरा यार

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