Thursday, April 4, 2013

फिर से एक बार

चल पडा है राही फिरसे एक बार, मंजिल की खोज मे सागर के उस पार
राहों से है दोस्ती, तुफानों से मस्ती, तनहाई की कश्ती, लेकर उस पार

आखों मे रोशनी लिए, सपनों के जलते दिए, उम्मीदों का बेडा लगाने उस पार
चल पडा है राही फिरसे एक बार

बुस्दिलीको ठोक कर, मुश्किलोंको रोक कर, खुली सांस की नय्या लगाने उस पार
चल पडा है राही फिरसे एक बार

जख्मों से उभर कर, दर्द  से सुधर कर, प्रीत का झंडा लहराने उस पार
चल पडा है राही फिरसे एक बार

शोर-शराबा छोड कर, मारामारी मरोड कर, होठों पर मुस्कान लाने उस पार
चल पडा है राही फिरसे एक बार

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