Saturday, April 21, 2012

राहत


घना अंधेरा चारों ओर
बस, एक खामोशी का ही शोर|
रोशनीको सायोंका डर
मन का खाली कोना, जैसे सुनसान घर|

एक कभी न रूकनेवाली खाँसी
गहरी उदासी|
सुखें आंसूसे भरी आँखे
खुदका अंधापन देखें|

दिलमें है घबराहट
सुनी डरावनी मुस्कुराहट
उड गए चेहरेके रंग
न किसीका है संग|

बेरंगसी ये दुनिया
अधुरी कहानियां
टुटे-फुटे कंगन
जैसे तुफान के बाद आंगन|

मुलायम मासूम कली
कभी नही खिली
तितली भी न उडी
अकेलेपनसे जुडी|

एक झुठा वादा
और एक कच्चा इरादा,
अपनोसें कभी न कहा
परायोंसे भरा सारा जहाँ|

बिखरे-बिखरे शिशे
नाकाम कोशिशे
सर पे बांध के कफन
किया सबकुछ दफन

बन जा तू काफिर
हो जा मुसाफिर
छोड दे सब की चाहत
ले तू जिंदगीसे राहत| 

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